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पुष्कर से अपहृत बालक १६ वें दिन उज्जैन की मातृछाया में मिला…
उज्जैन | सेवा भारती का मातृछाया भवन जहां तीन वर्षीय लक्ष्य जो अपना नाम अभी तक सभी को विवेक ही बता रहा था उसने मां-बाप से बिछड़े 16वें दिन जब मां की पहली झलक देखी तो मम्मी….मम्मी… बोलते फूट पड़ा और मां सरिता के आंचल से लिपट गया। तीन वर्षीय लक्ष्य को उसके पिता सन्नी के ही साथी सलीम नामक बेलदार ने 12 मार्च को पुष्कर से अपहृत किया था।
यहां चाईल्ड लाईन सेवा के जरिए मातृछाया सेवाभारती में पहुंचे लक्ष्य (3) तक पहुंचने में पुष्कर की पुलिस तथा माता-पिता को सौलह दिन लग गए। आज सुबह 10 बजे जब मातृछाया में मां-बेटे आमने-सामने हुए तो दोनों की आंखों में आंसू थे। लक्ष्य को उज्जैन रेलवे स्टेशन से 13 मार्च को एक महिला की सूचना पर जीआरपी पुलिस ने पुणे-इंदौर गाड़ी से बरामद किया था तथा चाईल्ड लाईन सेवा पुष्पा मिशन के सुपुर्द किया था जहां से बाद में लक्ष्य को मातृछाया लाया गया।
यहां माता-पिता के साथ पुष्कर थाने के टीआई महावीर शर्मा भी पहुंचे। टीआई शर्मा ने बताया कि 13 मार्च को पुष्कर थाने में बच्चे के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज हुई थी तथा चित्तौड़ (राज) रेलवे स्टेशन से लेकर उज्जैन तक के सीसीटीवी फुटेज देखे और उज्जैन रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ टीआई हर्ष चौहान से बच्चे के संबंध में बातचीत की तो उन्होनें कहा कि एक बच्चा रेलवे स्टेशन पर कुछ दिनों पूर्व मिला था तथा उसे चाईल्ड लाईन के सुपुर्द किया गया है।
पूछताछ के बाद पुष्कर थाना टीआई पुष्पा मिशन चाईल्ड लाईन तथा बाद में मातृछाया मक्सी रोड पहुंचे और बच्चे के फोटो लेकर पुष्कर थाने में मात-पिता से पहचान करवाई। तस्दीक पुरी होने पर माता-पिता को भी उज्जैन बुलाया जहां बुधवार सुबह 10 बजे बच्चे को माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया।
माता-पिता और खुद का नाम विवेक ही बोल पाता था
तीन वर्षीय लक्ष्य केवल विवेक नाम का उल्लेख कर रहा था। पहले मातृछाया सहित जीआरपी व चाईल्ड लाईन भी उसे विवेक ही मान रही थी लेकिन माता-पिता के साथ पांच वर्षीय बड़ा भाई विवेक भी मातृछाया आया तो मालूम हुआ कि लक्ष्य अपने बड़े भाई का नाम ही इतने दिनों से पुकार रहा था।